नमस्कार प्रणाम जोहार, आप सभी को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं,, छठ मईया हम सब पर शहाय हो, छठी मईया पुरे दुनिया पर कृपा वर्षाये। आपने पुछा है, छठ की ओ पाँच खास बातें जो हम सब को अपनी और खिंचती हैं प्रभावित करती है, इस पृथक संस्क्रति समाज वाले प्रयद्वीप में तमाम प्रकार के त्योहार है, दीपावली दसेहरा होली इन सब मौके पर आप घर आते हैं, लेकिन बता दूँ की छठ पर्व हीं एक ऐसा महांपर्व है जिसमें आप अपना घर नही अपना गावँ आते हैं, छठ घर नहीं बुलाता है छठ गावँ बुलाता है। बोलिये गा कैसे तब, छठ तभी होता है जब आपको पता चले की बगल वाले मास्टर साहब का सुप आपके यहाँ आया है, जब आपको पता चले की फलनवाँ दुकान वाले भईया जो हैं ऊ सुप और डाला आपके यहाँ ला के दे दियें हैं, काई बार येसा होता है कि हमारा सुप उनके यहाँ गया है , तो छठ एसे होता है। छठ एसे होता है, कि झुनकी माई आयेगी आंटा सानेगी ठेकुवा बन रहा है तो फिर फलनावाँ माई आयेगी , बडकी काकी आयेगी मोहल्ला वाली हऊ चाची आयेगी, हई बुवा आयेगी, बिना, बुवा, चाची, फलनवाँ माई, फलनवाँ काकी के बिना छठ नहीं हो सकता है, छठ में इन सब का आना छठ म...