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अरे रे मेरी जान है राधा/ Village love

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  अरे रे मेरी जान है राधा अरे रे मेरी जान है राधा , तेरे पे कुर्बान है राधा , रह ना सकुंगा तुमसे दूर मैं | ई गाना बचपन में जब बजता था न तो हम अप्पन प्यार के याद करके खूब नाचते थे | चिल्ला चिल्ला के एक दम धून में धून मिला के राधा राधा बोल के हम गाना खतम होते होते तक पूर्ण रूप से कृष्णा जी बन जाते थे, उस उमर में पता नहीं था की जौन राधा को याद करके हम रीपीट मोड पे गाना सुन रहे हैं ओकरा बियाह 16 साल टपते हीं ओकरा बाबू मईया दहेज़ के चलते  40 साल के बुढ़वा से कर देगा | जब भी बने तू राधा श्याम बनूंगा , जब भी बने तू सीता राम बनूंगा , तेरे बिना आधा सुबह शाम बनूंगा और आसमां से राधा राधा नाम कहूंगा ,,, इ लाइन में बहुत फीलिंग्स था | हमरी जिंदगी की राधा सामने हो चाहे ना हो पर साला आंख जब बंद करते थे तो दिखती सामने थी | गाना गाते गाते एतना मुस्कुराते थे जैसे ओकरा हमरा बियाह हो गया है | फिर गाना खतम होते हीं उ सपना अधूरा सा लगने लगता था | सब जगह मानो जैसे सन्नाटा पसरा हो | यूपी , बिहार , झारखंड के लोवर मिडिल क्लास वाला पैरेंट्स सब पैसा के पीछे खूब भागता है , काहेकी गरीबी के मार दू ...

अपना ख्याल रखना / Village love story

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  इस महामारी के बीच कितना सुकून देता  है ना तुम्हारा बार बार कैसे हो? और अपना ख्याल रखना वाला मैसेज।  कभी कभी लगता है मेरे गाँव की बूढ़ी दादी सही कहती थी कि प्रकृति बदला ले रही है लोगो से कोरोना के रूप में।  मनुष्यों ने प्रकृति को बहुत रुलाया है, अब देखो न जब प्रकृति बदला ले रही है तो लोगों को जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने लगी, चीजे घूम के फिर वही आ गयी।  -लेकिन ये सब तुम मुझे क्यों बता रहे हो। -क्योंकि एकदिन मैं भी ऐसे ही मारा जाऊंगा।  -क्या फालतू बातें करते हो, कुछ गजलें वजले सुनाओ, मरने मारने की बात मुझे पसंद नही है। -लेकिन मरना तो एकदिन सबको है, तुम इस सच से क्यों भाग रही।  -मैं सच से नही भागती लेकिन तुम्हरा मरना औरों के मरने से अलग है, शीट मैं भी न तुम्हारे बातों में आकर क्या बोलने लगे गयी।  -मैं कोई सेलिब्रिटी तो नही हूँ जिसके मरने में और लोगों के मरने में फर्क हो, इसमें दुःखी क्या होना।  -तो जिस दिन मैं मरूँगी उस दिन तुम बहुत खुश होंगे क्या? नहीं,  फिर क्या करोगे? मैं तुम्हारे हाथों को अपने हाथों में लेकर किसी नदी से गुजर...

गांव का प्यार / Village love

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                                   ❤️ गांव का प्यार ❤️ गांव की वो गोरी.. बहुत याद आती है..! मगर  कभी  खुशी.. कभी आंसू दे जाती है..!! दरवाजे की ओट से.. वह हमें देखती थी..! ओझल न हो जाए.. तब तक निरेखती थी..!! देखते  थे  हम  भी.. जब बगीचे में आती थी..! नजरें बचाकर सबकी.. हमें देख मुस्कुराती थी..!! लगता था हमें जैसा.. वो  सब  बहाना  था..! महुआ बिनने के बहाने.. हमें देखने आना था..!! चाहत हमारे दिल में भी थी.. मगर  कहने  से  डरते  थे..! कहीं बदनाम ना हो जाए वो.. हम  सहमे  सहमे  रहते  थे..!! इशारों  इशारों  में  ही.. बहुत सी बातें होती थी..! गांव  का  प्यार  था  साहब.. सो सपनों में मुलाकाते होती थी..!! वक्त   ने   करवट  ली.. हम  कमाने  को  परदेस  गए..! वापस आए  तो विदाई  थी  उसकी.. झर ~ झर  आंखों  से  नीर  बहे...!...