Hostel life Independence Day
सब क्रिकेट खेलने चला गया है,कुछ लड़के बचे हैं।जो पूरी जिम्मेदारी को सिर उठाये झंडा चौक के पेड़ों को रंगने में लगे हैं।नोवी क्लास के छात्रों ने मिलकर झंडा चौक को साफ कर दिया है। बाहर से गुजर रहे लोग उत्सुकता भरे नजर से कैंपस को देख रहे हैं,लड़कों के उत्साह को बढ़ाने के लिए ये काफी है।क्रिकेट खेलने गए टीम में कुछ टीम हार कर आएगी ये तय है।कैम्प्स में हिप हिप हुर्रे की गूंज उठी हुई है।दिन के काम लगभग लगभग निपट चुका है। बुनिया बनाने वाली टीम,आ चुकी है।चाँद सर हर बार की तरह खुद में बहुत ज्यादा व्यस्त है।ना चाहते हुए भी सुमन सर छात्रावास अधीक्षक बन गए हैं।पंक्तियों में सभी सर बैठे हुए हैं,बस चांद सर को छोड़ कर।केम्पस में हलचल एकदम से बढ़ गयी है।अब बुनिया का सुगंध आना शुरू हो चुका है। शाम के काम पर बच्चो से ईंटा पिसवाया जा रहा है।भले यह कंजूसी का एक रूप लग सकता है,लेकिन यह इमोशन बन चुका है।बच्चे लगातार ईटा को पाउडर बनाने में लगे हैं।जिसे सुबह लाइन देने के लिए प्रयोग किया जाएगा।पिटी सर को बतौर इंटरनेशनल परेड कराने की उत्सुकता है। सुबह हो चुकी है।चापाकल में नहाने की होड़ मची हुई है।एक एक बाल्...