इतना डरा दिया लोगों ने मोहब्बत में हमें,उसे हीर तो मुझे राँझा जैसा बना दिया ।।
उसके गली से गुजरना भी क्या अजीब हुआ, इतना टुट में वहाँ की गली ने जुडकर मुझे मशहूर कर दिया।। इतना बेखबर हुवा में मै जब खबर हुवा तो बर्बाद आशिक़ बन चुका था मै।। जमने ने हमारे मोहब्बत का भी क्या विरोद्ध किया, जहाँ हम पहली बार मिले थे वहां मकां बना दिया।। उसके अदा में एसे अदाकारी बना मैं, इतना रोया उसके मोहब्बत में की आंशु सुख गये ।। इतना टुट कर चाहा हमने उसे, जब जुड तो जमाने ने पागल करार दिया।। इतना डरा दिया लोगों ने मोहब्बत में हमें, उसे हीर तो मुझे राँझा जैसा बना दिया ।। -निलेश मेहरा