फ़ंडा सरकारी नौकरी का
सरकारी नॉकरी,
बड़ा जालिम सा शब्द है ना! फिर भी सबको इसकी चाहत है, सब कोई इसके ही पीछे पड़ा है, तो भाईसाहब का भाव खाना तो बनता है!
रास्ता भले सबलोगों का अलग अलग हो, लेकिन मंजिल तो यही है मतलब सरकारी नॉकरी यार!
इसकी चाह लोगों को इतनी होती है की इसके लिए लोग कुछ भी कर गुजरने को तैयार बैठे रहते है! इसको पाने के तरीके भी दोनों वर्गों के लिए अलग अलग होते है, दोनों वर्गों मतलब नही समझे का, यार अमीर लोग और गरीब लोग भाई!
लेकिन सरकारी नॉकरी तो एक छत की तरह हो गयी जहाँ पहुँचना है!
लेकिन असली स्टोरी तो सीढ़ी में होती है जो आपको वहा तक पहुँचाती है, और यहाँ सीढ़ी एडुकेशन है मतलब की पढ़ाई!
आपका सीढ़ी यानि कि पढ़ाई जितना मजबूत रहेगा आप उतना जल्दी सरकारी नॉकरी तक पहुँचोगे!
लेकिन सारा खेल पढ़ाई का ही होता है! अमीरों के लिए पढ़ाई के मायने अलग होते है उनके सपने भी बड़े होते है! खैर उनके बारे में बात करके भी क्या फायदा!
प्रॉब्लम तो हम गरीबों के लिए है जो सपने भी अपने हैसियत के अनुसार देखते है।
हम गरीब लौंडो का उतना फरमाईस अमीर लौंडो की तरह नही होता है, की ये नॉकरी नही करेंगे इसमें AC रूम नही होता है! लेकिन हमलोग में ऐसा नही होता है, हमलोग को कोई भी नॉकरी मिल जाए बस! सिर्फ सरकारी होना चाहिए बाकी तुम धूप में भी बिठा लो भैया! क्यों न चपरासी का ही हो बस सरकारी होना चाहिए!
क्योंकि हमने देखा है अपने माँ बाप का दुख, हमने देखा है उनको दिनदिन भर मजदूरी करते हुए, हमने देखा है अपने माँ को बुखार में भी खाना बनाते हुए!
और पता है जब हमलोग मना करते है न उनको की, क्यों इतना दुःख बर्दास्त करते हो! तो पता है वो क्या बोलते है कि बेटा सिर्फ तुम, एक तुम ही हो जो हमारा दुख खत्म कर सकता है!
तब पता चलता है सरकारी नॉकरी क्या होता है जो तुमलोग के लिए गवर्मेंट जॉब है, और फिर लग जाते है अपना सीढ़ी मजबूत करने में दिन रात एक करने लगते है और इधर हमलोग का बाप अपनी एड़ी चोटी लगा देता है बेटा को सीढ़ी से गिरने से बचाने के लिए, यही एक सराकरी नॉकरी के चक्कर में साहब कई वर्षों तक समझो तो तप करते है! ताकि मम्मी पापा के बाकी बचे जीवन को रोशनी से भर सके!
ये कईयों के दुखों का कारण औऱ आने वाले खुशियों का नोटिफिकेशन है।
✍️ Abhijeet Mehra✍️
रास्ता भले सबलोगों का अलग अलग हो, लेकिन मंजिल तो यही है मतलब सरकारी नॉकरी यार!
इसकी चाह लोगों को इतनी होती है की इसके लिए लोग कुछ भी कर गुजरने को तैयार बैठे रहते है! इसको पाने के तरीके भी दोनों वर्गों के लिए अलग अलग होते है, दोनों वर्गों मतलब नही समझे का, यार अमीर लोग और गरीब लोग भाई!
लेकिन सरकारी नॉकरी तो एक छत की तरह हो गयी जहाँ पहुँचना है!
लेकिन असली स्टोरी तो सीढ़ी में होती है जो आपको वहा तक पहुँचाती है, और यहाँ सीढ़ी एडुकेशन है मतलब की पढ़ाई!
आपका सीढ़ी यानि कि पढ़ाई जितना मजबूत रहेगा आप उतना जल्दी सरकारी नॉकरी तक पहुँचोगे!
लेकिन सारा खेल पढ़ाई का ही होता है! अमीरों के लिए पढ़ाई के मायने अलग होते है उनके सपने भी बड़े होते है! खैर उनके बारे में बात करके भी क्या फायदा!
प्रॉब्लम तो हम गरीबों के लिए है जो सपने भी अपने हैसियत के अनुसार देखते है।
हम गरीब लौंडो का उतना फरमाईस अमीर लौंडो की तरह नही होता है, की ये नॉकरी नही करेंगे इसमें AC रूम नही होता है! लेकिन हमलोग में ऐसा नही होता है, हमलोग को कोई भी नॉकरी मिल जाए बस! सिर्फ सरकारी होना चाहिए बाकी तुम धूप में भी बिठा लो भैया! क्यों न चपरासी का ही हो बस सरकारी होना चाहिए!
क्योंकि हमने देखा है अपने माँ बाप का दुख, हमने देखा है उनको दिनदिन भर मजदूरी करते हुए, हमने देखा है अपने माँ को बुखार में भी खाना बनाते हुए!
और पता है जब हमलोग मना करते है न उनको की, क्यों इतना दुःख बर्दास्त करते हो! तो पता है वो क्या बोलते है कि बेटा सिर्फ तुम, एक तुम ही हो जो हमारा दुख खत्म कर सकता है!
तब पता चलता है सरकारी नॉकरी क्या होता है जो तुमलोग के लिए गवर्मेंट जॉब है, और फिर लग जाते है अपना सीढ़ी मजबूत करने में दिन रात एक करने लगते है और इधर हमलोग का बाप अपनी एड़ी चोटी लगा देता है बेटा को सीढ़ी से गिरने से बचाने के लिए, यही एक सराकरी नॉकरी के चक्कर में साहब कई वर्षों तक समझो तो तप करते है! ताकि मम्मी पापा के बाकी बचे जीवन को रोशनी से भर सके!
ये कईयों के दुखों का कारण औऱ आने वाले खुशियों का नोटिफिकेशन है।
✍️ Abhijeet Mehra✍️

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