अपना ख्याल रखना / Village love story
इस महामारी के बीच कितना सुकून देता है ना तुम्हारा बार बार कैसे हो? और अपना ख्याल रखना वाला मैसेज।
कभी कभी लगता है मेरे गाँव की बूढ़ी दादी सही कहती थी कि प्रकृति बदला ले रही है लोगो से कोरोना के रूप में।
मनुष्यों ने प्रकृति को बहुत रुलाया है, अब देखो न जब प्रकृति बदला ले रही है तो लोगों को जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने लगी, चीजे घूम के फिर वही आ गयी।
-लेकिन ये सब तुम मुझे क्यों बता रहे हो।
-क्योंकि एकदिन मैं भी ऐसे ही मारा जाऊंगा।
-क्या फालतू बातें करते हो, कुछ गजलें वजले सुनाओ, मरने मारने की बात मुझे पसंद नही है।
-लेकिन मरना तो एकदिन सबको है, तुम इस सच से क्यों भाग रही।
-मैं सच से नही भागती लेकिन तुम्हरा मरना औरों के मरने से अलग है, शीट मैं भी न तुम्हारे बातों में आकर क्या बोलने लगे गयी।
-मैं कोई सेलिब्रिटी तो नही हूँ जिसके मरने में और लोगों के मरने में फर्क हो, इसमें दुःखी क्या होना।
-तो जिस दिन मैं मरूँगी उस दिन तुम बहुत खुश होंगे क्या?
नहीं,
फिर क्या करोगे?
मैं तुम्हारे हाथों को अपने हाथों में लेकर किसी नदी से गुजरना चाहता हूँ।
-तुम न फिल्मी बातें मत किया करों, चोरी किया हुआ लगता है तुम्हारी बातें।
तुम किसी रात मेरे कमरे के बाहर झांक कर देखना तुम्हारे लिए कितने शायरियां लिखता हूँ।
अरे मुझे कभी सुनाते क्यों नही एक काम करना कल तुम अपना डायरी लेते आना मैं पढूँगी।
लेकिन किसी की डायरी पढ़ना गलत बात है।
कोई गलत बात नही है तुम लेते आना।
नही मेरे मरने के बाद पढ़ना।
तुम फिर ऐसी बातें क्यों करने लगे।
क्योंकि मैंने भी प्रकृति की तरह तुमको बहुत रुलाया है।
तो क्या मैं तुमसे बदला थोड़ी लूंगी वो तो प्यार वाला रोना था।
बदला समय लेती है सामने वाला नही, एक दिन हम अलग हो जाएंगे और मेरा जीवन किसी मृत व्यक्ति की तरह हो जाएगा उस दिन मैं तुम्हें अपने डायरी को सौंप दूंगा तुम्हें।
तुम्हें फिर से लड़ने के मन है क्या? अगर लड़ना है तो बोलो मैं उठ कर चली जाऊंगी।
नही नही बैठो तुम्हे एक बशीर बद्र की शायरी सुनाता हूँ।
कितनी सच्चाई से मुझ से ज़िंदगी ने कह दिया
तू नहीं मेरा तो कोई दूसरा हो जाएगा
चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी।।
- निल्ल मेहरा।।

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