बाईक है मेरी लेके आऊंगा

छोटे शहरों में कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ भी कितना ख्याल रखती हैं सबका...और इस क्रम में उनके आईने के सामने खड़े होने के वक्त में इजाफ़ा होने लगता है, बिंदी किसी के पसंद की लगानी होती है, दुपट्टा माँ के हिसाब से जो अंग को भरपूर ढक ले, लिपस्टिक थोड़ा हल्का कि मोहल्ले की आंटियां तंज ना कसें, कपड़े बाउजी के मन का ताकि समाज में उनका इज़्ज़त बरकरार रहे..........


और छोटे शहर के लड़के अक्सर लेट आते हैं मिलने उस ओढ़नी से चेहरा बांधे खड़ी लड़की से जहाँ इंतज़ार कर रही वो बहुत घबराई हुई बार-बार घड़ी देखती है और एक डर जो हमेशा सताता है "कोई देख ना ले".....

सोचता  हूँ   कि  बंद  कमरे  में ,
एक शमआ-सी जल रही होगी ।

शहर की  भीड़-भाड़  से   बचकर ,
तू   गली   से  निकल  रही  होगी  ।

- दुष्यन्त कुमार

लड़के को लेट इसलिए होता है कि वो हिरो बनना चाहता है कहानी का, बड़बोलेपन में कहता है "बाईक है मेरी लेके आऊंगा".. बाईक के जुगाड़ में वो पुरा शहर छान देता है, अंत में किसी दोस्त के फुफा के चचरे भाई के साले की बाईक हाथ लगती है जिसकी सिर्फ अगली ब्रेक सही है, तीन बार मरते मरते बच के घर आता है, कौआ स्नान के बाद एक उधारी का परफ्यूम लगा के हाथों से बाल सही करते बाईक स्टार्ट करता है.. और पुरे 50 मिनट लेट पहुँचता है उस लड़की के पास जो संवर के आई है... आते ही कहता है "सॉरी थोड़ा लेट हो गया", लड़की बनावटी गुस्सा दिखाती है और बैठ जाती है पीछे और वो जी लेना चाहती है उस आजादी को जो ये दुनिया उसे देना नहीं चाहती है, शहर से बाहर निकलते ही दुपट्टा चेहरे से खोल लेती है और उस वक्त नभ में विराजमान सूर्य बाईक पे बैठी उस चांद का दिदार करता है...

लोग झूठ कहते हैं तुम चाँद का टूकड़ा हो,
मैं  कहता   हूँ  चाँद   तुम्हारा    टूकड़ा  है ॥

लम्हें को हमेशा के लिए रोक लेना चाहते हैं वे दोनों, मंजिल का पता नहीं बाईक आगे चलते रहती है... फिर किसी एकांत में दोनों बैठना चाहते हैं जहाँ सिर्फ वे दोनों हों और वो बाईक... बातें नहीं हैं करने को दोनों के पास,बस साथ अच्छा लगता है दोनों को एक दूसरे का... पता नहीं क्यों इस उम्र का निश्छल प्रेम एकांत मांगता है, समर्पण मांगता है.... और इसी समर्पण के साथ वो हो जाना चाहते हैं एक दूसरे के उम्र भर के लिए....
उमर के बाद तक के लिए भी... या जब तक ये दुनिया अस्तित्व में रहे तब तक के लिए...
फिर अचानक फोन बजने लगता है, वो बाईक जिस दोस्त के वकालत से वो मांग लाया है उसी का फोन आता है वो बार-बार... फिर लड़की भी अपने कलाई में झांक के कहती है.. "अब चला जाए वरना देर हो जाएगी"....

ना चाहते हुए भी दोनों लौट आते हैं उस दुनिया में, हाँ उसी दुनिया में जो उन्हें आजाद नहीं देखना चाहती है, घर से 200 मीटर दूर ही उतर जाती है वो ताकि "कोई देख ना ले"...

- @nill

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