छठ घाट, तुम और हम
सुनों...
हम और तुम छठ करेंगे पूरे परिवार के साथ मिलकर,
एक साथ उपवास रहेंगे। यही 'गिरिडीह' के एक सुदूर देहात के पोखरे में घंटों खड़े होकर इस कार्तिक महिने के जड़ाह भोरहरी में रूठे आदित्य को थरथराते हुए मनाएंगे हम एक-दूसरे को दयाभाव से देखते रह जाएंगे।
ऐसे में कभी-कभी तो परिवार वालों के लिहाज़ से एक-दूसरे को देख भी नहीं पाएंगे, तब हम पोखरे के पानी में प्रतिबिंबित तुम्हारा मनन्त माँगता हुवा चेहरा देखने का प्रयत्न करते हुए पकड़े जाएंगे।।
तुम्हारी 'मुस्कराहट' तब देखते बनेगी.......❤
- निल्ल मेहरा
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