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छठ घाट, तुम और हम

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  सुनों...  हम और तुम छठ करेंगे पूरे परिवार के साथ मिलकर, एक साथ उपवास रहेंगे। यही 'गिरिडीह' के एक सुदूर देहात के पोखरे में घंटों खड़े होकर इस कार्तिक महिने के जड़ाह भोरहरी में रूठे आदित्य को थरथराते हुए मनाएंगे हम एक-दूसरे को दयाभाव से देखते रह जाएंगे। ऐसे में कभी-कभी तो परिवार वालों के लिहाज़ से एक-दूसरे को देख भी नहीं पाएंगे, तब हम पोखरे के पानी में प्रतिबिंबित तुम्हारा मनन्त माँगता हुवा चेहरा देखने का प्रयत्न करते हुए पकड़े जाएंगे।। तुम्हारी 'मुस्कराहट' तब देखते बनेगी.......❤ - निल्ल मेहरा 

यही दशहरा है।

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       यही दशहरा है, जिसमें दीपकवा बाऊजी से पईसा मांगता है दशहरा मेला घुमने के लिए, बाऊजी इशारा करते हैं खुंटी पे टंगे कुरता के तरफ और दीपक तीन सौ रुपया पा के कहता है "सब ले लें".. बाऊजी मुस्का के कहते हैं "अरे ले ल, सब तोहरे त ह, तु ही त हव"...  अलग बात है ये थोड़ा-सा फिल्मी बात लग रहा होगा कि कवनो गाँव के दीपकवा को उसके बाऊजी तीन सौ रुपया कैसे इतना आसानी से दे दिए होंगे... पर चलिए मैनेज किजीए हर बाप एक जैसा नहीं होता है महराज आदमी-आदमी पे निर्भर करता है, पर ऐसा मत समझिये हुजूर हर बाप का एक मजबूरी होता है, हो सकता हो 300 रुपये में ही उसे सबको मेला दिखाना हो जो कि आज संभव नहीं है, पर कभी था तो मैं तभी की बात कर रहा हूँ या हो सकता है अभी भी कहीं गाँव देहात में ऐसा हो!! भैया सब के जमाने में तो 300 में बहुत था.. तब हम पहली बार जिद्द कर के घर से 100 रुपया लिए थे और कुछ दस टकिया नोट भी जिसके गर्मी से कॉलर उठा के गए थे मेला देखने वही छोटका, रजुआ, मुकेशवा के साथ ।। तब 3 रुपया में दो सिंघाडा मिलता था, 6 रुपया में फुल प्लेट चार्ट, जलेबी 7 रुपये पउवा था।। रास्ता में कोई ह...

बाईक है मेरी लेके आऊंगा

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छोटे शहरों में कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ भी कितना ख्याल रखती हैं सबका...और इस क्रम में उनके आईने के सामने खड़े होने के वक्त में इजाफ़ा होने लगता है, बिंदी किसी के पसंद की लगानी होती है, दुपट्टा माँ के हिसाब से जो अंग को भरपूर ढक ले, लिपस्टिक थोड़ा हल्का कि मोहल्ले की आंटियां तंज ना कसें, कपड़े बाउजी के मन का ताकि समाज में उनका इज़्ज़त बरकरार रहे.......... और छोटे शहर के लड़के अक्सर लेट आते हैं मिलने उस ओढ़नी से चेहरा बांधे खड़ी लड़की से जहाँ इंतज़ार कर रही वो बहुत घबराई हुई बार-बार घड़ी देखती है और एक डर जो हमेशा सताता है "कोई देख ना ले"..... सोचता  हूँ   कि  बंद  कमरे  में , एक शमआ-सी जल रही होगी । शहर की  भीड़-भाड़  से   बचकर , तू   गली   से  निकल  रही  होगी  । - दुष्यन्त कुमार लड़के को लेट इसलिए होता है कि वो हिरो बनना चाहता है कहानी का, बड़बोलेपन में कहता है "बाईक है मेरी लेके आऊंगा".. बाईक के जुगाड़ में वो पुरा शहर छान देता है, अंत में किसी दोस्त के फुफा के चचरे भाई के साले की बाईक ...

दुस्कर्म का बढ़ता प्रकोप और हम

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                      दुस्कर्म का बढ़ता प्रकोप और हम  देश में मानवता को शर्मसार करने वाली जघन्य अपराधों के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है, चाहे निर्भया कांड का परिणाम या हैदराबाद वाला इन्काऊटर उससे भी आज हैवानियत नहीं थम रही है, पिछ्ले दिनों हैदराबाद के सैदाबाद इलाके से 6 वर्ष की नाबालिक की दुष्कर्म का मामला सामने आया था, अब दुष्कर्म का ताजा मामला हजारीबाग के दारु इलाके का है। मिली जानकारी के मुताबिक हजारीबाग में दारु थाना के अन्तर्गत गोपलो के एक नाबालिक के साथ सामुहिक दुस्कर्म की वारदात को अंजाम दिया है,  इस सम्बंध में पीडिता के बयान पर पोक्सो एक्ट के तहत दारू थाना में प्रार्थमिकी दर्ज की गई है, मिले बयान के अनुसार 18 सितंबर की सुबह ही, पीड़िता अपने घर से 100 मिटर की दुरी पर अपने शहेलीयौ के साथ टहलने जा रही थी, इसी क्रम में  मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात 5 युवकों ने उसे जबरन उठा कर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाकर पाँचो युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया।  पीड़िता की ईलाज शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में चल रही है, जानकारी ...

Nille amber e-book

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Hostel life Independence Day

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  सब क्रिकेट खेलने चला गया है,कुछ लड़के बचे हैं।जो पूरी जिम्मेदारी को सिर उठाये झंडा चौक के पेड़ों को रंगने में लगे हैं।नोवी क्लास के छात्रों ने मिलकर झंडा चौक को साफ कर दिया है। बाहर से गुजर रहे लोग उत्सुकता भरे नजर से कैंपस को देख रहे हैं,लड़कों के उत्साह को बढ़ाने के लिए ये काफी है।क्रिकेट खेलने गए टीम में कुछ टीम हार कर आएगी ये तय है।कैम्प्स में हिप हिप हुर्रे की गूंज उठी हुई है।दिन के काम लगभग लगभग निपट चुका है। बुनिया बनाने वाली टीम,आ चुकी है।चाँद सर हर बार की तरह खुद में बहुत ज्यादा व्यस्त है।ना चाहते हुए भी सुमन सर छात्रावास अधीक्षक बन गए हैं।पंक्तियों में सभी सर बैठे हुए हैं,बस चांद सर को छोड़ कर।केम्पस में हलचल एकदम से बढ़ गयी है।अब बुनिया का सुगंध आना शुरू हो चुका है। शाम के काम पर बच्चो से ईंटा पिसवाया जा रहा है।भले यह कंजूसी का एक रूप लग सकता है,लेकिन यह इमोशन बन चुका है।बच्चे लगातार ईटा को पाउडर बनाने में लगे हैं।जिसे सुबह लाइन देने के लिए प्रयोग किया जाएगा।पिटी सर को बतौर इंटरनेशनल परेड कराने की उत्सुकता है। सुबह हो चुकी है।चापाकल में नहाने की होड़ मची हुई है।एक एक बाल्...

अरे रे मेरी जान है राधा/ Village love

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  अरे रे मेरी जान है राधा अरे रे मेरी जान है राधा , तेरे पे कुर्बान है राधा , रह ना सकुंगा तुमसे दूर मैं | ई गाना बचपन में जब बजता था न तो हम अप्पन प्यार के याद करके खूब नाचते थे | चिल्ला चिल्ला के एक दम धून में धून मिला के राधा राधा बोल के हम गाना खतम होते होते तक पूर्ण रूप से कृष्णा जी बन जाते थे, उस उमर में पता नहीं था की जौन राधा को याद करके हम रीपीट मोड पे गाना सुन रहे हैं ओकरा बियाह 16 साल टपते हीं ओकरा बाबू मईया दहेज़ के चलते  40 साल के बुढ़वा से कर देगा | जब भी बने तू राधा श्याम बनूंगा , जब भी बने तू सीता राम बनूंगा , तेरे बिना आधा सुबह शाम बनूंगा और आसमां से राधा राधा नाम कहूंगा ,,, इ लाइन में बहुत फीलिंग्स था | हमरी जिंदगी की राधा सामने हो चाहे ना हो पर साला आंख जब बंद करते थे तो दिखती सामने थी | गाना गाते गाते एतना मुस्कुराते थे जैसे ओकरा हमरा बियाह हो गया है | फिर गाना खतम होते हीं उ सपना अधूरा सा लगने लगता था | सब जगह मानो जैसे सन्नाटा पसरा हो | यूपी , बिहार , झारखंड के लोवर मिडिल क्लास वाला पैरेंट्स सब पैसा के पीछे खूब भागता है , काहेकी गरीबी के मार दू ...