वैशाख मास जा चुकी है,खेत में खिरा ककरी तरभुज (जेठूवा) लहलहा रही हैं, पुरवईया के लहर से खजुर पेड़ में माटी के लभनी भरने लगी हैं, आम का पेड़ चटकदार आचार वाला आम केलिये बिल्कुल तैयार है। वैशाख - ज्येठ हर किसी को अपने लहर में सराबोर कर चुका है। मतवाले मन को भोर की हवा में घुली मॅंजर की खुशबू एक अलग संसार में ले जा रही है, मैं दावे के साथ कहता हूँ एक अलग मादकता होती है इस खुशबू में, और इस खुशबू की जगह कोई इत्र या परफ्यूम नहीं ले सकता है। चिड़ियों की चहचहाट में कोयल भी अपनी मीठी बोल से मोहित कर रही है, पर वो सबको मोहित भी कहाँ कर पा रही है! बाकी एक सप्ताह से मौसम बिग्ड़ेल सी हो गई है। कोरोना की दुसरी लहर अपने चर्म सीमा पे है, और शादी बियाह लगन का स्वेग एक अलग लेवल पर चड़ बेठा है, यहाँ हर दसवें व्यक्ति में एक कोरोना संक्रमित है। कितने सपने आशा अरमान रोज अस्पताल की चोखट पर अपनों का साथ छोड़ती जा रही है, अपंग होती हेल्थ सिस्टम और सरकार से अब शमसान भी बिलख उठा है की भाई अब तो सुधार जाओ । "कहा जाता है की होठों पे सच्चाई रहती है, जहाँ दिल में सफ़ाई रहती है,, हम उस देश क...