बुढापा जिवन का सत्य
देखीये हम और हमारी सभ्यता भले हीं गारो, खासी जयंतीया की पहाड़ियों को नाँघ कर आज 3×10^8 m/s से भी तेज रफ्तार चलने वाली 5 जी के जमाने तक आ पहुंची है, पर इस सफर में जो रास्ते हैं, उन्हें कड़ी बा कड़ी जोड़े रखने का प्रमाण हमारे पूर्वजों से मिलतीं है। परंतु हमारे लिये दादा जी एक एसे समकालीन पूर्वजों में से एक है, जो हमको अपना इतिहास सभ्यता और संस्कृति के उस अंतिम क्षोर को हमारी हांथो में सौंपते है जो उनके पुर्व था, जिसे हमें भी अपने आने वाले 6G,7G तक के भावी पीढ़ी के हांथो में जिमेदारी पुर्वक सौपना होगा। जिवन चक्र मे इतिहास बदलेंगी, मानव सभ्यता का विकाश होगा परंतु इन सब मे एक निकाय स्देव नियत रहेगी जिसे हम बुढापा कहते हैं, जो अक्सर गालों की झुरियं, सफेद बाल, फटी एड़ी, आँख का धुंधलापन, कमर और घुठनो का दर्द, टुटे दाँत आदी लक्षण से हमे पता चलती है। जो हमे बताती है कि, आधुनिकता सर्वप्रथम अफगान स्नो पाऊडर से आज के वाईट ट्यून फेस पाऊडर तक की सफर को भले ही तय कर ली है, लेकिन आने वाले दिनो में तुम्हारे गालों पर भी झुरियं आयेगी, जिस दुरी को तुम आज चसम...