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दुस्कर्म का बढ़ता प्रकोप और हम

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                      दुस्कर्म का बढ़ता प्रकोप और हम  देश में मानवता को शर्मसार करने वाली जघन्य अपराधों के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है, चाहे निर्भया कांड का परिणाम या हैदराबाद वाला इन्काऊटर उससे भी आज हैवानियत नहीं थम रही है, पिछ्ले दिनों हैदराबाद के सैदाबाद इलाके से 6 वर्ष की नाबालिक की दुष्कर्म का मामला सामने आया था, अब दुष्कर्म का ताजा मामला हजारीबाग के दारु इलाके का है। मिली जानकारी के मुताबिक हजारीबाग में दारु थाना के अन्तर्गत गोपलो के एक नाबालिक के साथ सामुहिक दुस्कर्म की वारदात को अंजाम दिया है,  इस सम्बंध में पीडिता के बयान पर पोक्सो एक्ट के तहत दारू थाना में प्रार्थमिकी दर्ज की गई है, मिले बयान के अनुसार 18 सितंबर की सुबह ही, पीड़िता अपने घर से 100 मिटर की दुरी पर अपने शहेलीयौ के साथ टहलने जा रही थी, इसी क्रम में  मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात 5 युवकों ने उसे जबरन उठा कर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाकर पाँचो युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया।  पीड़िता की ईलाज शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में चल रही है, जानकारी ...

Nille amber e-book

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Hostel life Independence Day

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  सब क्रिकेट खेलने चला गया है,कुछ लड़के बचे हैं।जो पूरी जिम्मेदारी को सिर उठाये झंडा चौक के पेड़ों को रंगने में लगे हैं।नोवी क्लास के छात्रों ने मिलकर झंडा चौक को साफ कर दिया है। बाहर से गुजर रहे लोग उत्सुकता भरे नजर से कैंपस को देख रहे हैं,लड़कों के उत्साह को बढ़ाने के लिए ये काफी है।क्रिकेट खेलने गए टीम में कुछ टीम हार कर आएगी ये तय है।कैम्प्स में हिप हिप हुर्रे की गूंज उठी हुई है।दिन के काम लगभग लगभग निपट चुका है। बुनिया बनाने वाली टीम,आ चुकी है।चाँद सर हर बार की तरह खुद में बहुत ज्यादा व्यस्त है।ना चाहते हुए भी सुमन सर छात्रावास अधीक्षक बन गए हैं।पंक्तियों में सभी सर बैठे हुए हैं,बस चांद सर को छोड़ कर।केम्पस में हलचल एकदम से बढ़ गयी है।अब बुनिया का सुगंध आना शुरू हो चुका है। शाम के काम पर बच्चो से ईंटा पिसवाया जा रहा है।भले यह कंजूसी का एक रूप लग सकता है,लेकिन यह इमोशन बन चुका है।बच्चे लगातार ईटा को पाउडर बनाने में लगे हैं।जिसे सुबह लाइन देने के लिए प्रयोग किया जाएगा।पिटी सर को बतौर इंटरनेशनल परेड कराने की उत्सुकता है। सुबह हो चुकी है।चापाकल में नहाने की होड़ मची हुई है।एक एक बाल्...

अरे रे मेरी जान है राधा/ Village love

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  अरे रे मेरी जान है राधा अरे रे मेरी जान है राधा , तेरे पे कुर्बान है राधा , रह ना सकुंगा तुमसे दूर मैं | ई गाना बचपन में जब बजता था न तो हम अप्पन प्यार के याद करके खूब नाचते थे | चिल्ला चिल्ला के एक दम धून में धून मिला के राधा राधा बोल के हम गाना खतम होते होते तक पूर्ण रूप से कृष्णा जी बन जाते थे, उस उमर में पता नहीं था की जौन राधा को याद करके हम रीपीट मोड पे गाना सुन रहे हैं ओकरा बियाह 16 साल टपते हीं ओकरा बाबू मईया दहेज़ के चलते  40 साल के बुढ़वा से कर देगा | जब भी बने तू राधा श्याम बनूंगा , जब भी बने तू सीता राम बनूंगा , तेरे बिना आधा सुबह शाम बनूंगा और आसमां से राधा राधा नाम कहूंगा ,,, इ लाइन में बहुत फीलिंग्स था | हमरी जिंदगी की राधा सामने हो चाहे ना हो पर साला आंख जब बंद करते थे तो दिखती सामने थी | गाना गाते गाते एतना मुस्कुराते थे जैसे ओकरा हमरा बियाह हो गया है | फिर गाना खतम होते हीं उ सपना अधूरा सा लगने लगता था | सब जगह मानो जैसे सन्नाटा पसरा हो | यूपी , बिहार , झारखंड के लोवर मिडिल क्लास वाला पैरेंट्स सब पैसा के पीछे खूब भागता है , काहेकी गरीबी के मार दू ...

कोरोना की तिसरी लहर/ Corona third wave

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 वैशाख मास जा चुकी है,खेत में खिरा ककरी तरभुज (जेठूवा) लहलहा रही हैं, पुरवईया के लहर से खजुर पेड़ में माटी के लभनी भरने लगी हैं, आम का पेड़ चटकदार आचार वाला आम केलिये बिल्कुल तैयार है।  वैशाख - ज्येठ हर किसी को अपने लहर में सराबोर कर चुका है। मतवाले मन को भोर की हवा में घुली मॅंजर की खुशबू एक अलग संसार में ले जा रही है, मैं दावे के साथ कहता हूँ एक अलग मादकता होती है इस खुशबू में, और इस खुशबू की जगह कोई इत्र या परफ्यूम नहीं ले सकता है। चिड़ियों की चहचहाट में कोयल भी अपनी मीठी बोल से मोहित कर रही है, पर वो सबको मोहित भी कहाँ कर पा रही है! बाकी एक सप्ताह से मौसम बिग्ड़ेल सी हो गई है। कोरोना की दुसरी लहर अपने चर्म सीमा पे है, और शादी बियाह लगन का स्वेग  एक अलग लेवल पर चड़ बेठा है, यहाँ हर दसवें व्यक्ति में एक कोरोना संक्रमित है। कितने सपने आशा अरमान रोज अस्पताल की चोखट पर अपनों का साथ छोड़ती जा रही है, अपंग होती हेल्थ सिस्टम और सरकार से अब  शमसान भी बिलख उठा है की भाई अब तो सुधार जाओ । "कहा जाता है की होठों पे सच्चाई रहती है, जहाँ दिल में सफ़ाई रहती है,, हम उस देश क...

अपना ख्याल रखना / Village love story

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  इस महामारी के बीच कितना सुकून देता  है ना तुम्हारा बार बार कैसे हो? और अपना ख्याल रखना वाला मैसेज।  कभी कभी लगता है मेरे गाँव की बूढ़ी दादी सही कहती थी कि प्रकृति बदला ले रही है लोगो से कोरोना के रूप में।  मनुष्यों ने प्रकृति को बहुत रुलाया है, अब देखो न जब प्रकृति बदला ले रही है तो लोगों को जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने लगी, चीजे घूम के फिर वही आ गयी।  -लेकिन ये सब तुम मुझे क्यों बता रहे हो। -क्योंकि एकदिन मैं भी ऐसे ही मारा जाऊंगा।  -क्या फालतू बातें करते हो, कुछ गजलें वजले सुनाओ, मरने मारने की बात मुझे पसंद नही है। -लेकिन मरना तो एकदिन सबको है, तुम इस सच से क्यों भाग रही।  -मैं सच से नही भागती लेकिन तुम्हरा मरना औरों के मरने से अलग है, शीट मैं भी न तुम्हारे बातों में आकर क्या बोलने लगे गयी।  -मैं कोई सेलिब्रिटी तो नही हूँ जिसके मरने में और लोगों के मरने में फर्क हो, इसमें दुःखी क्या होना।  -तो जिस दिन मैं मरूँगी उस दिन तुम बहुत खुश होंगे क्या? नहीं,  फिर क्या करोगे? मैं तुम्हारे हाथों को अपने हाथों में लेकर किसी नदी से गुजर...

इस क्षण तक बाबा साहब

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  देश आज़ाद हो गया था। संविधान सभा की आख़िरी बैठक चल रही। गणराज्य की स्थापना की तैयारियां आख़िरी दौर में थीं। संविधान सभा में राय बनी कि मामले पर बहस का समापन बाबा साहब भीमराव आंबेडकर करें और उन सवालों का जवाब दें जो इस सिलसिले में उठे थे। जिस व्यक्ति को सिर्फ ड्राफ्टिंग का ज़िम्मा दिया गया था, उनके लिए यह गौरव का क्षण था। संविधान की ड्राफ्टिंग से आगे बढ़कर बाबा साहब उस समय तक देश के प्रमुख राष्ट्र निर्माताओं के तौर पर गिने जाने लगे थे। तमाम सहमतियों और असहमतियों के साथ संविधान सभा जानती थी कि नए बनते राष्ट्र की चुनौतियों को समझने की एकमात्र समग्र दृष्टि बाबा साहब के पास है। इसलिए नेहरू, पटेल समेत कई वरिष्ठ सदस्यों के होते हुए भी बाबा साहब को यह ज़िम्मा सौंपा गया कि वे बहसों और आपत्तियों का जवाब दें। बाबा साहब का वह ऐतिहासिक भाषण साबित हुआ। ऐतिहासिक इस मायने में नहीं कि इस भाषण में कोई अभूतपूर्व जोश या विद्वता थी। यह एक संयमित और बहुत संभलकर बल्कि सहमकर दिया गया भाषण है। इस भाषण में बाबा साहब नए बनते राष्ट्र की चुनौतियों की ओर संकेत करते हैं और उन चुनौतियों से निबटने का उपाय बताते ...