Sorry for that's

 

कभी कभी हम किसी चिज के लिए कुछ एसी गलती कर जाते हैं ,जिसका प्रभाव हमें खुद नही पता होता है, हवावों के संग बहता हुआ तिनका की तरह मन में चल रहे उस उम्मीद की तुफान में बहते रह जाते है, जब तक की हमें यह ना पता चल जाए, की हमसे नाता रखने वाले, रिस्ते नाते, दोस्ती, प्यार, भाई बहन, आस,विस्वाश, और उम्मीद जैसे कई प्रकार की चीजें पीछे छूटता चला जा रहा होता है।

जिसका प्रभाव हमें आखरी में देखने को मिलती है, शायद  रिस्ते नाते, दोस्ती, प्यार, भाई बहन, आस,विस्वाश, उम्मीद और साथ में एक छोटी सी गलती, इन सब के बिच में एक अजीब सी सरहदें ला देती है।

शायद "गलत को छोटी गलती कहना हमारी गलती होगी क्यों की गलतीयाँ छोटी हो या बड़ी गलती बस गलत होती है।

गलती करना, उस गलती को भूल जाना और फिर से गलती करना अर्थात मनुष्य अपनी सारी ज़िन्दगी गलतियां करता है, उन गलतियों से सीखता है और नादानी में फिर गलतियां करता है अथवा जीवन की सीख और उसका व्यापन गलतियों पर ही आधारित होता है।

फिर भी इन सब के बावजूद भी हमसे जब कुछ अलग प्रकार की गलती हो जाती हैं ना, तो उस गलती को लेकर दिन रात सोचते रहते हैं कि हमें येसा नहीं करना चाहिए था, सोचते सोचते वह बात दिमाग में एक Re-cycle की तरह घूमते रहती है,

पता नहीं अपनी गल्तियों का पस्चाताप कैसे करुँ, समझ नहीं आता की हमारी गलतियों की नौख से खिची गई उस दरार को कैसे erage करुँ।

So, I want to say ,  extremely sorry for that. 

@Nill_Mehra 





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