Hoste life
होस्टल लाइफ
कुछ लोगों के लिए जन्नत है ये शब्द, कुछ के लिए कैदखाना और कुछ के लिए सिर्फ बकवास सा सिर्फ एक शब्द!
हमने भी होस्टल लाइफ को जिया है,साफ समझ लो कि हमने भी जन्नत को जी लिया है!
अगर तुम होस्टल में रह चुके हो तो तुमको पता होगा कि मैंने होस्टल को जन्नत क्यों कहा!
खैर बात अंदर की करते है! अंदर मतलब वो अंदर नही यार! भक्क कुछ भी सोचते हो!
अंदर मतलब गहराई यार!
हा तो हम उस स्कूल के लौंडे है, जहाँ हर साल रिजल्ट में कई रिकॉर्ड बनते है, अपने इलाके का!
नही समझे क्या?
अरे वही भाई जिसका नाम Sc Residential government High School+2 MDP Deoghar है।
इस नाम से आप दो चीज पता कर सकते है! पहला की हम SC वर्ग से हैं। और दूसरा की हम होस्टल के लौंडे है!
अब वहां से नाता कुछ पुराना हो गया है, लेकिन वहाँ के लोग अभी भी आत्मा में घुसे है! और घुसे रहेंगे!
मैं ज्यादा उन दिनों को याद नही करना चाहता! याद करते ही आँख भर जाती है! सब कुछ शांत लगने लगता है, उन कमीनों के बिना!
सोचता हूँ कि उन कमीनों के बिना ऐसे बोझ जैसे जिंदगी को कैसे जी पाएंगे! वो रहते तो पहाड़ भी लाद कर झेल सकते थे!
और याद भी कैसे न आए! जिंदगी को कितना इजी बना दिया था उनलोगों ने!
लोगों को साइंस लेते ही फटने लगती है! और शुरुआत से ही एकदम पढ़ते रहता है सबकुछ त्याग कर!
लेकिन हमलोगों ने साइंस को भी सीरियसली नही लिया था! और यहाँ बिल्कुल उल्टा था! हमने सब मौज मस्ती के लिए पढ़ाई को ही त्याग दिया था!
और इसी तरह हमलोग के लिए साइंस इजी बन गया था!
खैर अपना एक ग्रुप था, जो हर क्लास पे भारी पड़ता था! मैं यानी अभिजीत मेहरा, अमरेंद्र, दिवाकर, अंकुश, पंकज,संजीत, नीतीश, अभिषेक और अदृश्य विशाल जिसका एंट्री मौके पे ही होता था! ये सब हमलोग पुराने थे, लेकिन दो और नए लौंडे थे जो कुछ ही दिन में कलेजे का टुकड़ा बन गया था!
नीतीश(निल्ल मेहरा) और कुंदन!
अगर आप बोरिंग फील कर रहे है, तो संजीत से मिलिए! अगर आपको कोई प्लान बनाना है तो अमरेंद्र से मिलिए! अगर आपको चुतियागिरी करना है तो अंकुश से मिलिए, अगर आपको फोटो एडिट और मोबाइल, कंप्यूटर आदी से सम्बंधित काम है तो चमन मतलब निल्ल मेहरा
से मिलिए!
कुछ बड़ा मेटर है मतलब कहि फ़ंस गए हो तो विशाल से मिलिए! और आपको कोई नया काम और कुछ करने जाना है नया कुछ तो कुंदन और नीतीश से मिलिए!
डॉ पढ़ने वाला बुतरू भी था जो पढ़ाकू कम चुतियागिरी ज्यादा मतलब कुल मिलाकर सभी चीजों का मिश्रण था उसमें! दिवाकर और निल्ल
और जुनून, जोश और बकैती करना है तो अभिषेक और पंकज जिंदाबाद!
जब एक ही ग्रूप में इतना सारा टेलेंट हो तो, सोच सकते हो कि कैसा जीवन जिया हमने!
अब तक का सारा कांड हमने मिलकर ही किया है!
अगर भगवान कुछ मांगने को बोले तो मैं वही कमीनों का साथ मांग लूँगा!
और जीवन भर उनलोगों के साथ मग्न हो जाऊंगा!
पूरी दुनिया को भूलकर!
मैं उम्रभर उस स्कूल का इसलिए भी कर्जदार रहूँगा क्योकि उस स्कूल ने मुझे इन कमीनों से मिलवाया था!
जिसने दोस्ती का मतलब सीखा दिया!

Comments
Post a Comment