प्यार नहीं है खेल प्रिये
तुम संध्या गंगा घाट की, मैं गावँ का उगता सूरज प्रिये,
तुम रेलवे स्टेशन कोरोना काल की,मैं बस स्टेन्ड़ सा घनघोर प्रिये।
हम देशी लोंडा JAC बोर्ड का,तुम CBSE की क्वीन प्रिये,
तुम अंग्रेजी एंकर विवित्त भारती की , हम ठहरें देशी ललनटॉप प्रिये।
कैसे होगा मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये।
तुम रेलवे स्टेशन कोरोना काल की,मैं बस स्टेन्ड़ सा घनघोर प्रिये।
हम देशी लोंडा JAC बोर्ड का,तुम CBSE की क्वीन प्रिये,
तुम अंग्रेजी एंकर विवित्त भारती की , हम ठहरें देशी ललनटॉप प्रिये।
कैसे होगा मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये।
-निल्ल मेहरा

Comments
Post a Comment