Student life
का रे मोहन कब आया रे बाबू "हाँ भैया कल ही आये हैं तिन बजवा ट्रेन से" पढाय लिखाय आर सब ठीक "अभी सब ठिके ठाक चल रहा है। हमरा भाई पंकजवा बोल रहा था सांइस लेके पढ़ रहा है तुम "हाँ भैया" ठिके हो बाऊ मन लगाय के पढ़, हम सोच रहा था पंकज को तोरे साथ भेज दें। हम मोहन कुमार जिला गिरिडीह से पिछ्ले 2019 से हजारीबाग शहर मे इंटर साइंस की पढाई करने के लिए आए रहे थें, उहे शहर जहाँ हर एक 10×10 वाला कमरा में NIIT, JEE, jac जिला टॉपर्स का सपना सर पर लिये रोजे तिन बजे रात बत्ती बूझाता है, जहाँ कोर्रा चौक से लेकर डिस्ट्रिक्ट मोड़ तक रोजे साम और सुबह आम आदमी के भीड़ से जादा स्टूडेंट का सब का भीड़ रहता है। जहाँ हर एक गली में जेनरल स्टोर के पोस्टर को छोड़ कर कोचिंग का पोस्टर जादा मिलता है, जहाँ कलम कॉपी ,दोस्ती प्यार ,मोहब्बत, कट्टा, पिस्तौल सब एके गली में घूमता है,जहाँ गिरिडीह वाला हुटी बजार से जादा व्यपार शिक्षा का होता है, इस प्रकार से और भी बहुते शहर है पर हमरा हजारीबाग कोनो कम नहीं। यहाँ मिडिल क्लास वाला जादा स्टूडेंट्स पढ़ते हैं ,और ऊ भी हमरा जईसन सब गिरिडीह के लग्भग 70% । ईह...