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कोचिंग का शिक्षक दिवस

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अंकुश,का रे रमेशवा तुमरा डरेश में अभी तक आयरन नही मराया है, उतने क्रिच मारो अन्ज्लीया तुमको चुनने वाला नहीं है। रमेशवा ,हट बे डरो मत तुमरा वाला नही छिनेगे, पहले एक से निपट लो बाद में हम तक पहुंचाना। बात ये है कि हमरा हॉस्टल में 12th बेच के 35 लड़कों बिच खाली रमेशवे आयरन खरीदा था काहे से कि बेटा ऊ बहुते स्टाइल मार के कोचिंग जाता था,  खैर आज लगभग लड़का के मन में यही चलता था,बस आज किसी तरह से ई शिक्षक दिवश के उत्प्रेरक हम दुनु के बिच पगलेट वाला अभिक्रिया सुरु करवा दे।  इसलिए सब अपन अपन ड्रेस में क्रीच मारे के लिए रमेशवा को चार दिन पहले से खर्चा पानी देना सुरु कर देता था, बाद में फिर अपना अपना स्पीच पर सब एक नज़र फेरते थे,  साथ में पंकजवा जईसन संगीत में रुचि रखे वाला लड़का ,दिलवाले फिल्म का गाना के पुरा केसिट दिमाग में कॉपी कर के शिक्षक दिवस मनाने चलते थे । वहाँ पहुँच कर सबसे पहले सारा क्लास सजाते थे, कोई रिब्बन लगाता था, कोई बलून फुलाता था, सबसे ज़्यादा परेशानी सेलोटेप का छोर खोजने में होती थी, और गुस्सा सबसे ज़्यादा उसपे आता था जो बलून फुलाता कम , फोड़ता ज़्यादा था। वहीं केंक लाने ...

Khortha love latter

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                  .........Khortha love latter ........                                      मोर करेजा के टुकड़ा                                @Nill Mehra  स्वीट हार्ट कोलेसरी,                                         “लिख रहा हूँ खत खून से स्याही का मत समझना,         बौराया हूँ सिर्फ तुमरे पियार में जमाने का मत समझना ।“ बहुते मुश्किल से ई लोकडोन में कलम आर कॉपी उठाये है तुमको लेटर लिखने के लिए। जिया धकधकाय रहा है, हथवा हड़बडाय रहा है, हैण्डराइटिंग ठीक से बैठ नहीं रहा है, पहली बार जो लिख रहे है न, तो तनी माफ़ कर देना गोल-गोल लिखाय नहीं रहा है, लेकिन हमर जज़्बात एकदम गोल-गोल आर ठोस हय गे कलेसरी। पहले तोर गाँवा...

गांव का प्यार / Village love

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                                   ❤️ गांव का प्यार ❤️ गांव की वो गोरी.. बहुत याद आती है..! मगर  कभी  खुशी.. कभी आंसू दे जाती है..!! दरवाजे की ओट से.. वह हमें देखती थी..! ओझल न हो जाए.. तब तक निरेखती थी..!! देखते  थे  हम  भी.. जब बगीचे में आती थी..! नजरें बचाकर सबकी.. हमें देख मुस्कुराती थी..!! लगता था हमें जैसा.. वो  सब  बहाना  था..! महुआ बिनने के बहाने.. हमें देखने आना था..!! चाहत हमारे दिल में भी थी.. मगर  कहने  से  डरते  थे..! कहीं बदनाम ना हो जाए वो.. हम  सहमे  सहमे  रहते  थे..!! इशारों  इशारों  में  ही.. बहुत सी बातें होती थी..! गांव  का  प्यार  था  साहब.. सो सपनों में मुलाकाते होती थी..!! वक्त   ने   करवट  ली.. हम  कमाने  को  परदेस  गए..! वापस आए  तो विदाई  थी  उसकी.. झर ~ झर  आंखों  से  नीर  बहे...!...

Love shayri in hindi

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यूँ ना आया करो बिना ताल्लुक के तुम ख़्वाबों में, घरवाले देख लेंगे तो क्या जवाब दूँगा मै। Yun naa aaya karo bina talluk ke tum khwabo mai, Gharwale dekh lenge to kya jwab dunga mai. पढ ना ले मेरा दर्द कोई अल्फाज़ बदल लेता हूँ मै अगर आँख मे नमी आये, तो आवाज़ बदल लेता हूँ मैl Padh na le mera dard koi Alfaaz badal leta hoon mai  Agar ankh me nami aaye  To aawaj badal leta hoon mai .  सुना हैं वापस लौटने में सरकार भी मदद कर रही हैं.💃🏻 अब, तुम भी लौट आओ ना....          Suna hain... Wapas loutne me sarkar bhi help kar rahi he, Ab , Tum bhi lout aayo na.  गुज़र गया वो वक़्त  जब तेरी हसरत थी मुझको,  अब तू खुदा भी बन जाए  तो भी तेरा सजदा ना करू। Gujar gya o wakt  Jab teri hasrat thi mujhko, Ab tu khudda bhi ban jaye To bhi tera sajda naa karun. वो कह कह रही थी, सुना हे शायरी करने लगे हो आज कल, उसे कैसे बताऊँ मोहब्बत भी करने लगा हूँ। Wo Kehne Lagi Suna Hai Shayeri Karte Ho Ab Use Kaise Batao Mohabbat Bhi Karta hoon इश्क चख ल...

आज आयी जो बारिश...तो याद आया वो जमाना,

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आज आयी जो बारिश... तो याद आया वो जमाना, तेरा बाालकनी पे रहना... और मेरा सड़कों पर नहाना।।

तुम श्रावण वाली बारिश बनना,जब मैं, ग्रीष्म काल सी खेत बनू।

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तुम श्रावण वाली बारिश बनना, जब मैं, ग्रीष्म काल सी खेत बनू। रिम-झिम राग सुना जाना तुम, तब मैं, उड़न पंजाब सी खेत बनू। तुम गंगा वाली दरिया सा बन, जब मैं, सुखी नदियों सा रेत बनू। कल-कल संग बहा जाना तुम, तब मैं,आखरी मंजिल तक साथ बहुँ।  तुम बन जाना बूँद बादलों में रहनें वाली सी, जब मैं,कचे मकानों की चुवने वली सी छत बनू । गड़-गड़ धुन धुन सुना जाना तुम, तब मैं,सदियों नील गगन में तुझे देख सकूँ। तुम श्रावण वाली बारिश बनना, जब मैं, गृषम काल सी खेत बनू। रिम-झिम राग सुना जाना तुम, तब मैं, उड़न पंजाब सी खेत बनू। -निल्ल मेहरा  

इतना डरा दिया लोगों ने मोहब्बत में हमें,उसे हीर तो मुझे राँझा जैसा बना दिया ।।

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उसके गली से गुजरना भी क्या अजीब हुआ, इतना टुट में वहाँ की गली ने जुडकर मुझे मशहूर कर दिया।। इतना बेखबर हुवा में मै  जब खबर हुवा तो बर्बाद आशिक़ बन चुका था मै।। जमने ने हमारे मोहब्बत का भी क्या विरोद्ध किया, जहाँ हम पहली बार मिले थे वहां मकां बना दिया।। उसके अदा में एसे अदाकारी बना मैं, इतना रोया उसके मोहब्बत में की आंशु सुख गये ।। इतना टुट कर चाहा हमने उसे, जब जुड तो जमाने ने पागल करार दिया।। इतना डरा दिया लोगों ने मोहब्बत में हमें, उसे हीर तो मुझे राँझा जैसा बना दिया ।। -निलेश मेहरा