प्रिय फुलमतिया, इ लेटरवा को फाड़ना मत प्लीज़! तुमको का लगा की छठ घाट पर नहीं आएंगे,ब्लॉक तो कर गई हो पर तुमको हम भुले नहीं हैं, करेजा छाप वाला डेरि मिल्क को पार्सल कर के तुमको भेजे थे। अभी तक तुम्हारा एस-एम-एस नहीं आया कि मेरा करेजा तुमको मिला कि नहीं! हम जानते हैं तुमको मिल गया होगा अउर तुम खा-ढेकार के भुल गई होगी। गावँ में कभी तुमसे मिल नही पाते हैं, बिना केकरो शादी बियाह, और मेला ठेला के, पुरा कोरोना काल के झेल्ला के बाद बहुते मुस्किल से एगो छठ पूजा आया जेकर से कतना लोग के आस जुड़ल था, और बिच में अचानक से झारखणड़ सरकार के आदेश छठ घाट पर प्रतिबंध, कसम से रे आदेश सुन के मन मरुवाय गया था, खैर हुवा हमरा जईसा कितना लोग के हाय और छठ मईया के कृपा से उ वाला आदेश को वापस लेना पड़ा, तब जा के मन तनी हरियर हूआ। पता है रे फुलमतिया हम लड़का सब ई साला ठंढा के दीन में एक सप्ताह तक नही नहाते हैं, और हम इ बरफ जाईशन पानी में तुमसे बस एक बार मिलने के लिए पहीला अरग और दुसरका अरग दुनु दिन नदी में नहा गये थे, ठंढ से देह भैब्रेट मोड़ में चल गया था।, और तुम है जो एक बार भी नहीं मिली, कसम से बह...